👁 54 विज़िटर देख चुके हैं
रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा (राप्रसे) के नियमों में एक बड़ा संशोधन करते हुए पदोन्नति के कोटे को बढ़ाकर पुनः 50 प्रतिशत कर दिया है। इस निर्णय के साथ ही अब डिप्टी कलेक्टर के पदों पर सीधी भर्ती और पदोन्नति का अनुपात फिर से 50-50 प्रतिशत हो गया है।

प्रमुख बदलाव और मांग
छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ लंबे समय से इस अनुपात को पूर्ववत करने की मांग कर रहा था। गौर करने वाली बात है कि:
- पुरानी व्यवस्था: वर्ष 2020 से पहले पदोन्नति का कोटा 50% ही था।
- पिछला संशोधन: वर्ष 2020 में पिछली सरकार ने इसे घटाकर 40-60 (40% पदोन्नति और 60% सीधी भर्ती) कर दिया था।
- वर्तमान निर्णय: सामान्य प्रशासन विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर इस कोटे को फिर से बहाल कर दिया है।
तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों में खुशी की लहर
इस निर्णय से प्रदेश के तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के लिए डिप्टी कलेक्टर बनने के अवसर बढ़ गए हैं। कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ का तर्क है कि:
- अनुभव का सम्मान: तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नत होने वाले अधिकारियों के पास औसतन 10 से 12 वर्षों का फील्ड अनुभव होता है।
- प्रशासनिक दक्षता: संघ के अनुसार, अनुभवी अधिकारियों की पदोन्नति से शासन की योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन बेहतर होगा और राजस्व मामलों का त्वरित समाधान संभव होगा।
संघ के प्रांताध्यक्ष के.के. लहरे ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए मुख्यमंत्री और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। सरकार के इस कदम को प्रशासनिक संतुलन और अधिकारियों के मनोबल को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

